Wednesday, August 19, 2009

जिन्ना को जसवंत की बलि....

12:26 PM


जब किसी संस्थान या किसी व्यक्ति को उसके भविष्य की चिंता सताती है तो उनमें कई परिवर्तन होना है जरुरी हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते है जब किसी राजनीतिक पार्टी को उसके भविष्य की चिंता सताती है तो क्या होता है? वही होता है जो बीजेपी का हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी आज अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतत है। इसी लिए वह श्रषि मुनियों का फंडा अपनाते हुए पहाड़ों पर शिमला में चिंतन बैठक कर रही है। पार्टी सचमुच एक बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। कई राज्यों की विधानसभा फिर और फिर लोकसभा चुनाव में हार के बाद, पार्टी के अंदरुनी कलह बीजेपी से पार्टी सेंसेक्स भारी गिरावट के तरह नीचे आ रही है।हाल के ताजा विवाद देखें तो राजस्थान में महारानी इस तरह अड़ गई जैसे पार्टी उनके लिए कुछ है ही नहीं। वसुंधरा राजे ने विपक्ष के नेता के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। लेकिन शायद वे जानतीं थीं बिना बीजेपी उनका अब कोई वजूद नहीं है इसलिए २ दिन बाद मान गईं। लेकिन बीजेपी के हनुमान ने अपनी लिखी किताब रूपी पूंछ में ऐसी आग लगाई की अपनी के पार्टी को जला दिया। मैं बात कर रहा हूं जसवंत सिंह की, बीजेपी के दार्जिलिंग से सांसद और समय समय पर बीजेपी के संकटमोचक रहे जसवंत सिंह जिन्ना को बलि चढ़ ही गए। बीजेपी ने उन्हे निलंबित कर दिया। शिमला में चिंतन बैठक के पहले ही दिन पार्टी के संसदीय बोर्ड ने ये फैसला किया। ऐसा जसवंत सिंह की किताब में सरदार पटेल की आलोचना करने पर किया गया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी घोषणा की। जसंवत सिंह ने दो दिन पहले अपनी किताब 'जिन्ना इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस' के विमोचन पर कोई बीजेपी नेता न पहुंचने के बाद यह तय हो गया था कि सच का सामना या कहें जसवंत की किताब का सामना बीजेपी नहीं कर पाएगी और हुआ भी । जसवंत सिंह बीजेपी में एक प्रमुख स्थान रखते थे। निष्कासन के बाद जसवंत सिंह ने प्रेसवार्ता में कहा- मैं दुखी हूं की पार्टी ने मुझे केवल एक किताब लिखने मात्र से मुझे निकाल दिया, मुझे हनुमान से रावण बना दिया। ये जो बात जसवंत सिंह ने कही उससे साफ झलकता है की बीजेपी में अब तानाशाही शुरू हो चुकी है। क्या बीजेपी अपने नेताओं का पढ़ना लिखना और बोलना भी बंद कराने वाली है। बुद्धिजीवियों की पार्टी कही जाने वाली बीजेपी में आज अभिव्यक्ति स्वतंत्रता का मतलब निष्कासन हो गया है। तो आप ही सोचकर बताईए एसी पार्टी क्या देश को चलाएगी। जसवंत सिंह की किताब को शायद ही किसी बीजेपी नेता ने पढ़ी हो. और अब उसे शायद ही पढ़े। गुजरात में जसवंत की किताब पर बैन लगा दिया गया है, क्या बीजेपी अपने अंत से डर गई है जो अनुशासन का चाबुक बताकर वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से इस तरह तानाशाही से निकाल रही है या फिर पार्टी में चल रही उठा पटक को एक झटके में बंद करने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है। भारत के विभाजन की विभिषिका को सुनने और जानने में आज के युवा शायद ही रुचि रखते हों लेकिन बुद्धिजीवियों और राजनीति से सरोकार रखने वाले लोगों द्वारा लिखी गई किताबों में समय- समय बंटवारे के अनछुए पहलुओं पर रोशनी डालती रहती है। लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया जाए। इससे पहले पाकिस्तान गए बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने जिन्ना सेकुलर बताकर बीजेपी में भूचाल ला दिया था। लेकिन वे पार्टी के मोस्ट सीनियर नेता होने के कारण बच गए। लेकिन जसंवत सिंह को यह मौका पार्टी ने नहीं दिया। तो क्या लालकृष्ण आडवाणी पर भी इसी तरह की सजा का प्रावधान नहीं होना चाहिए था। लंदन स्कूल ऑफ एक्नोमिक्स के वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा कि जसंवत की किताब जिन्ना पर है लेकिन उन्होंने पार्टीशन के लिए सभी की आलोचना की है चाहे वह पटेल हों या नेहरु। किताब में उन अनछुए पहलुओं पर नजर डाली गई जो शायद ही कोई नेता कह पाता। बीजेपी में वर्चस्व की लड़ाई और कार्यकर्ताओं में घोर निराशा साफ दिख रही है। पार्टी को एक किताब से ४ राज्यों में होने वाले चुनावों पर असर दिखा होता दिखा और जसवंत सिंह पर गाज गिर गई। बीजेपी अपने नेताओं और वरिष्ठ बुद्धिजीवियों का इस फूहड़ ढंग से निकाल रही है तो पार्टी के भविष्य अब भगवान भरोसे है। जसवंत एक संकेत हैं अरुण जेटली, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी के लिए, लेकिन बीजेपी के इस कदम से ऐसा नहीं लगता की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की कही बात " बीजेपी को जवान बनना होगा, पार्टी की कमान किसी युवा को मिलनी चाहिए"।शायद ही सच हो पाए।

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Tuesday, August 18, 2009

लौट के बुद्धु शाहरुख घर को आए..........

3:30 PM

देश अपनी स्वतंत्रता की 63वीं वर्षगांठ मना रहा था। वैसे कई लोग अब १५ अगस्त को एक छुट्टी के दिन के अलावा कुछ नहीं मानते, ये दिन उनके लिए मस्ती और घूमने-फिरने के लिए होता है। बस ये बात हम मीडिया वालों पर फिट नहीं होती और इस दिन उन्हें एक एक बड़ी खबर की दरकार रहती सो उन्हे वो खबर उन्हें मिल गई और खबर भी ऐसी की सारा देश टीवी के सामने बैठ गया। चैनल्स ने देश की आजादी की खबरों से अपनी खबरें हटाकर ब्रेकिंग न्यूज शुरू कर दी... "शाहरुख खान के साथ अमेरिका के नेवार्क एयरपोर्ट पर बदसलूकी"। अमेरिका में कुछ दिन पहले पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के साथ भी कुछ एसा ही हुआ था। लेकिन अब ये किंग खान के साथ हुआ है... बॉलीवुड के किंगखान को अमेरिका के नेवार्क एयरपोर्ट पर रोकने के बाद अमेरिकी पुलिस अधिकारियों द्वारा पूछताछ की घटना पर देशभर के लोगों की प्रतिक्रिया आई,,,, लोगों ने अपनी नाराजगी जताई, अपने प्रोफेसनल दुश्मन सलमान खान की टिप्पणी की। अमेरिका से न्यूज चैनल्स को फोनो दे-देकर शाहरुख ने भी अपनी भड़ास निकाली, बकौल शाहरुख " किसी दूसरे से नाम मिलने की वजह से मुझे रोका गया मुझे एक कमरे में ले जाया गया जहां कई लोग मौजूद थे मैंने बार-बार अधिकारियों से कहा कि मैं एक फिल्म एक्टर हूं और मुझे फोन पर बात करने की इजाजत दी जाए लेकिन उन्होंने मना कर दिया" तीन दिन बाद १८ अगस्त को अमेरिका से वापस लौटे शाहरुख खान ने अपने घर मन्नत में इसी मामले को लेकर पत्रकारों की फुल पैक्ड कॉन्फ्रेंस बुलाई... और फिर राजनीति शुरू हो गई। इसी मसले पर कई राजनीति लोगों से कुछ मीडिया वालों राय मांगी, बस फिर क्या था, समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने बोल बैठे शाहरुख खान पर, बकौल अमर सिंह.. शाहरुख ने ये सब अपनी फिल्म के प्रचार के लिए किया है।अमर सिंह आजकल सिंगापुर में अपना इलाज करा रहे हैं। अमर सिंह के बयान पर शाहरुख ने किया पलटवार और कहा अमर सिंह को और इलाज की जरुरत है, खैर शाहरुख खान एक अभिनेता हैं और अमर सिंह भी एक अभिनेता है, एक लोगों का मनोरंजन करके पैसा कमाता है। दूसरा अपने अंदाज-ए-बयां से मीडिया को मसाला देता है, जिससे खबरों को पढ़ने की रोचकता बनी रहती है। अगर मैं कुछ कहूं तो हमारे देश में अब मीडिया तय करने लगा है कि किसको, कहां, और कैसे दिखाया जाए। मुझे एक वाकया याद आता है, भारत के एक पूर्व राष्ट्रपति के निधन की खबर भी एक पूर्व डिप्टी सीएम की प्रेम कहानी की खबरों के आगे बेकार हो जाती हैं। अब शाहरुख खान लौट आए और कह रहें है अब न जाऊंगा अमेरिका। भई हम को यही कहते शाहरुख भाई आप अमेरिका जरुर जाएं लेकिन उनके कायदे कानून को यूं तामाशा न बनाएं। सभी पाठकों को स्वतंत्रता के 63वें वर्ष के लिए शुभकामनाएं। जय हिंद।

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चुप्पी साध गए पीएम........... सिंह

2:02 PM

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश की आजादी की 63वीं सालगिरह पर लाल किले पर तिरंगा फहराया इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कई घोषणाएं की सरकार के कामकाज के बारे में बताया फ्यूचर प्लानिंग भी बतायी आतंकवाद पर भी बोला लेकिन विपक्ष को ये बात अखर गयी की प्रधानमंत्री ने भारत-पाक साझा बयान पर कुछ बात क्यों नहीं की जिस पर पिछले दिनों खूब हंगामा भी हुआ था लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त नजर आए उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि किसी भी कीमत पर आतंकवाद को जड़ से खत्म किया जाएगा उन्होंने इसके लिए खुफिया तंत्र के साथ साथ सुरक्षा बलों को बेहतर बनाने की जरुरत पर जोर दिया प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में मुंबई हमले का जिक्र तो किया, लेकिन भारत-पाकिस्तान के साझा बयान पर चुप्पी साध गए प्रधानंमत्री मनमोहन सिंह की इस चुप्पी ने विपक्ष को निशाना साधने का एक मौका दे दिया विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री साझा बयान पर कोई जवाब देने नहीं चाहते। शर्म अल शेख मामले पर पाकिस्तान अपनी विजय मान रहा है, क्या है आखिर शर्म अल शेख का सच, क्या वास्तव में सरकार की वो एक बड़ी गलती थी। विपक्ष इस हमले एक बार फिर साबित कर दिया है कि शर्म अल शेख में दिए गए साझा बयान को लेकर मनमोहन सिंह की मुश्किलें आगे भी खत्म होनेवाली नहीं है।

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Friday, August 14, 2009

........और वो नहीं कर पाया सच का 'सामना'

1:16 PM



एक टीवी चैनल पर आने वाले शो 'सच का सामना' देखने वाला एक शख्स अपनी लाइफ के सच का सामना नहीं कर सका और सदमे में फांसी लगाकर जान दे दी। प्रोग्रैम देखकर एक्साइटमंट में उसने पत्नी से अपने सच का खुलासा करने को कहा, लेकिन सच को वह सहन नहीं कर सका। वह और उनकी पत्नी टीवी पर सच का सामना रेगुलर देखते थे। पत्नी ने पहले इससे इनकार किया, लेकिन अपनी कसम पति ने पत्नी को मना ही लिया। उन्होंने पत्नी को यकीन दिलाया कि सच जैसा भी हो, वह उसे मंजूर करेंगे और पत्नी को उतना ही प्यार करेंगे। भरोसे में आई पत्नी ने पति को बता दिया कि शादी से पहले उन्होंने अपने प्रेमी से शारीरिक संबंध बनाए थे। यह सुनकर पति को गहरा सदमा लगा। अगले दिन पति ने पत्नी की चुनरी का फंदा बनाया और खिड़की की ग्रिल के सहारे फांसी लगा कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन्हें रहस्य रखना ही बेहतर होता है। कई बार इनके खुलने से लोगों के जीवन में भूचाल आ जाता है। लेकिन टीआरपी के इस खेल अब ऐसे प्रोग्राम घर भी उजाड़ने लगे है। अगर सरकार ने जल्द कोई कदम नहीं उठाया तो शायद और कई जान ली लेगी।

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Tuesday, July 28, 2009

मसाज करवाइए, काम पर चलिए

1:52 PM

इटली के पीएम सिलवियो बर्लुस्कोनी की रंगीनमिजाजी के किस्से विश्व विख्यात हो रहे है। इटली के एक अखबार ने बर्लुस्कोनी के बारे में एक और गर्मागर्म खबर दी है। खबर यह है कि बर्लुस्कोनी ने पिछले साल एक स्पा में अपनी छुट्टियां बिताई थीं। खास बात यह है कि इस स्पा में उनके 'मसाज़' के लिए कुछ ग्लैमरस मॉडल्स और रिऐलिटी टीवी स्टार मौजूद थीं। अखबार के मुताबिक बर्लुस्कोनी पिछले साल 28 से 30 नवंबर तक इस स्पा में अपनी 'पीठ दर्द' से निजात पाने के लिए गए थे। तब उनकी खातिरदारी के लिए वहां कुछ नामी मॉडल्स और रिऐलिटी शो की स्टार्स भी मौजूद थीं। अखबार ने इनमें से दो लड़कियों की पहचान का दावा किया है। इनमें से एक टीवी स्टार बारबरा ग्वेरा और दूसरी मॉडल कम टीवी स्टार हैं। इन दोनों को बिजनसमन ग्रैमपाउलो ने इनवाइट किया था। बताया हैअब कोई प्रधानमंत्री मसाज भी नहीं करवा सकता क्या, अरे भई लड़कियों से करवाई तो क्या हुआ। पीठ का दर्द तो ठीक हो गया। वैसे भारत में रिएलिटी शोज के चलन ने कई देशों को पीछे छोड़ दिया है। जो इटली में हो रहा है वैसा होने में शायद.......

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फिर जाग उठा आरक्षण का 'भूत'

1:49 PM

एक बार फिर देश में आरक्षण का भूत जाग उठा। राजस्थान एक बार फिर आरक्षण की चिंगारियां सुलग उठी है, जिन्हे आग की भयंकर लपटें बनने में शायद ही दे लगे। राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जरो और सरकार में बातचीत के सफल नहीं हुई तो एक बार फिर से फिर गुर्जरों आंदोलन को कर सकते है। वैसे गुर्जरों की मांग नई नहीं है आरक्षण को लेकर गुर्जरों की मुहिम ने आजादी मिलने के तीन साल बाद ही जोर पकड़ लिया था मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा मिलने के बाद तो आरक्षण आंदोलन बेहद तेज हो गयागुर्जरों का आरक्षण के लिए संघर्ष लगभग 60 सालों से चल रहा है। आजादी मिलने के साथ ही गुर्जर अपने कौम के बेहतरी के लिए जूझ रहे हैं। इसी संघर्ष का नतीजा था कि 1951 में गुर्जरों को नॉन क्रिमिनल ट्राइब यानी गैर आपराधिक जनजाति का दर्जा मिला। लेकिन गुर्जरों की आरक्षण को लेकर मुहिम साल 1954 से शुरू हुई। जब मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा दिया गया और गुर्जरों की अपील खारिज कर दी गई। 1954 मीणा समुदाय को एसटी दर्जा मिला, गुर्जरों की अपील खारिज। लेकिन गुर्जरों की कोशिश साल 1981 के जनगणना के दौरान थोड़ी बहुत कामयाब होती दिखी जब उन्हें पहली बार पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। 1981 जनगणना में गुर्जरों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। लेकिन आरक्षण मुद्दे पर अपनी मांग को लेकर गुर्जरों का रूख शुरू से कड़ा था। और वो लगातार एसटी दर्जा दिए जाने की अपनी मांग पर कायम रहे। गुर्जरों की इस कोशिश को 1984 में शिवचरण माथुर की राजस्थान सरकार ने झटका दिया। राज्य सरकार ने एसटी दर्जा दिए जाने की मांग ठुकरा दी। 1984 - मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने गुर्जरों के एसटी दर्जा देने की मांग ठुकराई। गुर्जरों को वक्त-वक्त पर सरकार की ओर से दिलासा मिलता रहा। साल 1993 में इसी तरह का एक और आश्वासन गुर्जरों को राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करके दिया। 1993 गुर्जरों को ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा मिला। लेकिन 1999 में जाटों को ओबीसी का दर्जा मिलने पर गुर्जर एक बार फिर भड़के। 1999 जाटों को भी ओबीसी का दर्जा दिया गया। बीजेपी शासन के दौरान गुर्जरों का असली संघर्ष देखने को मिला। चुनाव कैंपेन के दौरान 2003 में वसुंधरा राजे ने एक बार फिर गुर्जरों को वादे का झुनझुना थमाया। 2003 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुर्जरों को एसटी दर्जा देने का वादा किया। वादा पूरा नहीं होने की सूरत में गुर्जर आंदोलन पर उतरे। साल 2007 में हुए आंदोलन के दौरान कई लोग मारे गए। 2007 एसटी दर्जे के लिए गुर्जर आंदोलन पर उतरे, आंदोलन के दौरान कई मारे गए। सरकार ने एक बार फिर गुर्जरों को दिलासा देने के लिए जस्टिस जसराज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। जून, 2007 गुर्जरों की मांग को लेकर जस्टिस जसराज चोपड़ा कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने गुर्जरों के आरक्षण की मांग को तो ठुकरा दिया। लेकिन उनके लिए स्पेशल पैकेज की मांग की। दिसंबर, 2007 जस्टिस चोपड़ा ने गुर्जरों को स्पेशल पैकेज देने की सिफारिश करते हुए आरक्षण की मांग खारिज की । इसी मुद्दे पर रामदास अग्रवाल कमेटी ने गुर्जर इलाके के लिए 2।82 अरब रुपए देने की सिफारिश की। 17 मई 2008 गुर्जर बहुल इलाके के लिए रामदास अग्रवाल कमिटी ने 2।82 अरब रुपए के पैकेज की सिफारिश की। 23 मई 2008 को गुर्जरों ने अपनी मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए। 23 मई 2008 गुर्जरों का प्रदर्शन, पुलिस फायरिंग में कई मरे। 26 मई बीजेपी की वसुंधरा सरकार ने मनमोहन सिंह को अपनी सिफारिश भेजी। 26 मई 2008 वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गुर्जरों को 4 से 6 फीसदी कोटा देने की सिफारिश की, 18 जून 2008 बीजेपी सरकार ने गुर्जरों के साथ रायका बंजारा और गड़िया लोहार को 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया। 18 जून, 2008 राजस्थान सरकार ने गुर्जरों के साथ तीन और जातियों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया। लेकिन आरक्षण का स्तर 50 फीसदी से ज्यादा होने की वजह से इस ऐलान ने संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया। 18 जून, 2008 गुर्जरों के साथ रायका, बंजारा और गड़िया लोहार को आरक्षण देने सिफारिश की लेकिन आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हुआ। तकरीबन एक साल बाद एक बार फिर गुर्जरों ने महापंचायत कर राज्य सरकार को 24 घंटे की मोहलत देते हुए। आंदोलन की धमकी दी है 27 जुलाई 2009 गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक बार फिर आंदोलन की धमकी दी। राजस्थान एक बार फिर सुलगने को है।

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'अरिहंत' व्हाट नेक्स्ट

12:54 PM

आईएनएस अरिहंत जी हां यही नाम है भारत की उस नई ताकत का जिसने समुद्री में हमारी ताकत को एक नयी शक्ति से नवाजा है। देसी इंजीनियरिंग का यह कमाल वाकई अद्भुत है।भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत एक पनडुब्बी ही नहीं ये एक ऐसी ताकत है जिसके बल पर भारत समुद्र का राजा बन गया है । कोई दुश्मन देश समुद्री सीमा में घुसने तो क्या देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकेगी। भारत में ही बनी ये पनडुब्बी अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। जो न केवल समंदर की प्रहरी होगी । बल्कि नौसेना के बेड़े में शामिल अरिहंत समंदर की सेनापति भी होगी । आईएनएस अरिहंत से देश ने कुछ ऐसी ही उम्मीदें बांध रखीं हैं। अत्याधुनिक तकनीक से बनी अरिहंत परंपरागत पनडुब्बियों के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है। आईएनएस अरिहंत को समंदर की सतह पर बैटरियों को चार्ज करने के लिए भी नहीं आना पड़ेगा। यानि ये पनडुब्बी लगातार समंदर में रह सकती है। इतना ही नहीं अरिहंत से मिसाइलें भी दागी जा सकती है । इसके लिए आईएनएस को देश की बहतरीन मिसाईलों से लैस किया जाएगा। जिसमें सागरिका मिसाइल के अलावा इसे अग्नि तीन से भी लैस किया जा सकता है। आईएनएस अरिंहत का वजन तकरीबन 6 हजार टन है 104 मीटर लंबी इस पनडुब्बी में एक साथ करीब सौ लोग रह सकते हैं एक बार समुंदर में उतरने के बाद अरिहंत अपने इम्तिहान के कड़े दौर से गुजरेगी । परिक्षण के दौरान आईएनएस अरिहंत को खुद को साबित करना होगा। क्योंकि इस पनडुब्बी की कामयाबी स्वदेशी तकनीकी के लिए नए रास्ते खोलेगी ।

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करगिल का काल, निगल गया कई लाल... विजय दिवस के १० साल ?

12:23 PM

करगिल... दुनिया के इस सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में आज से ठीक दस साल पहले भारत की जांबाज सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था॥ भारतीय सेना के इस शौर्य और जीत को पूरे देश विजय दिवस के रूप में मनाया गया । भारतीय सेना की जाबांजी और सैनिकों के सम्मान के लिये श्रीनगर के द्रास में विजय दिवस समारोह मनाया गया । इसमें करिगल युद्घ में शहीद सैनिकों का सम्मान किया गया। सेना कारगिल फतह का जश्न धूमधाम से मना रही थी। साथ ही शहीदों को श्रद्धांजलि भी दे रही है। अपना बलिदान देकर देश की आन-बान और शान को बचाने वाले शहीद जवानों के परिजनों का सम्मान किया गया। पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। मलिक उन्नीस सौ निन्यानवे में करगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय थल सेना के अध्यक्ष थे। दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जंग में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने दिल्ली के अमर ज्योति पहुंचे। छह मई को शुरु हुई ये लड़ाई दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र कारगिल में लड़ी गई थी अपने शौर्य और जज्बे से भारतीय सेना और वायुसेना ने दुश्मन को हार का मुंह दिखाया था। ये जंग भारतीय सेना के अलग-अलग रैंक के तकरीबन तीस हजार जवानों और अधिकारियों ने लड़ी थी। ऑपरेशन विजय को कामयाबी तक पहुंचाने में 527 जवानों ने अपने प्राणों की बलि दी और करीब 1300 जवान बुरी तरह जख्मी हुए थे सेना ने 26 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय में कामयाबी हासिल की। ये वो आंकड़े थे जो सरकारी थे। जंग में क्या हुआ ये सीमा पर लड़ रहे जवानों से बेहतर कोई नहीं बता सकता। जंग दो देश के बीच होती है लेकिन ये वो जंग थी जो अपने ही देश में लड़ी गई। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हमारी सीमा में घुसकर कई ठिकानों पक कब्जे भी कर लिए और हमें पता तक नहीं चला। दुश्मन पड़ोसी देश के सिपाहियों.. या कहें आतंकियों को खदेड़कर सरकार ने गर्व से कहा तो है कि हमने ये जंग जीत ली। लेकिन अपने लोगों को गंवाकर, ये सोचने का विषय है। भारत की प्राचीन परंपरा भी यही कहती है। सिर्फ बांटते रहो चाहे वो प्रेम हो या किसी की जान।

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Sunday, January 25, 2009

प्रधानमंत्री का 'दिल' बीमार

2:42 AM

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की देश के सबसे बड़े स्वाथ्य संस्थान एम्स में बाइपास सर्जरी हो चुकी है, अब वह 7 से 8 दिन तक इसी संस्थान के मेहमान बनकर रहेंगे। इससे पहले भी कई प्रधानमंत्रियों को अपने कार्यकाल के दौरान दिल की बीमारी या दूसरे कारणों से अस्पताल जाना पड़ा। साल 1964 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने दिल की बीमारी के कारण भुवनेश्वर में कांग्रेस सेशन देरी से ज्वाइन किया। साल 1964 में प्रधानमंत्री बनते ही लाल बहादुर शास्त्री को दिल का दौरा पड़ा। और डॉक्टरों ने उनको आराम करने की सलाह दी । जिसके कारण उन्हें लंदन में कॉमनवेल्थ प्राइम मिनिस्टर कांफ्रेंस में अपना दौरा रद्द करना पड़ा। साल 1991 में प्रधानमंत्री बनने से पहले नरसिंहाराव की यूएस में बाइपास सर्जरी कराई गई। लेकिन साल 2004 में दिल की बिमारी के कारण उनकी मौत हो गई। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को साल 2000 के नवंबर महीने में मुंबई के ब्रिच कैंडी हॉस्पीटल में भर्ती करना पड़ा। जहां उनके घुटने का सफल ऑपरेशन किया गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बाईपास सर्जरी के ऑपरेशन के चलते एम्स और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई। इस सर्जरी के कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 26 जनवरी को होनेवाले रिपब्लिक डे परेड में शामिल नहीं हो पाएंगे। पीएम का ऑपरेशन 11 डॉक्टरों की टीम कर रही थी। जिसमें मुंबई और एम्स के डॉक्टर शामिल किए गए । पिछले कुछ दिनों से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की खराब तबीयत सरकार के लिए चिंता का सबब रही है। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री जांच के लिए एम्स में दाखिल हुए थे। जांच के बाद डाक्टरों ने उनके दिल की पुरानी बीमारी पर गौर किया। और अब उन्होने एक बार फिर प्रधानमंत्री के हार्ट की बाइपास सर्जरी करने का फैसला किया 1990 में भी डा मनमोहन सिंह की बाई पास सर्जरी हो चुकी । इस बाईपास सर्जरी में एशियन हार्ट इंस्टीटीयूट मुंबई के डा पांडया और उनकी टीम भी मौजूद थे। जो एम्स के डाक्टरों को सहयोग कर रहे थे। एम्स के डाक्टरों के मुताबिक प्रधानमंत्री के दिल में तीन ब्लॉकेज थे और इसे हटाने के लिए तकरीबन 11 घंटे आपरेशन चला, जाहिर है बाईपास सर्जरी के बाद... प्रधानमंत्री जल्दी अपने कामकाज पर नहीं लौट सकेंगे। यानि साफ है कि प्रधानमंत्री गणतंत्र दिवस समारोह और 29 जनवरी के बीटिंग ऑफ रिट्रीट में, शामिल नहीं हो पायेंगे और ना ही फरवरी तक अपना कामकाज संभाल पायेंगे । प्रधानमंत्री की लंबी गैरमौजूदगी को देखते हुए, इस दौरान विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री का कामकाज संभालेंगे। कांग्रेस पार्टी के अलवा दूसरे दलों ने भी प्रधानमंत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी उनके जल्दी स्वस्थ होने की प्रार्थना की। बहरहाल ,एम्स के डाक्टरों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सर्जरी के बाद ५ से हफ्तों में बिलकुल ठीक होने की उम्मीद जताई है। हम सभी देश वासी भी प्रधानमंत्री के जल्दी ही स्वस्थ होने और देश का एक अच्छा भविष्य तैयार करने में की कामना करते है।

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Friday, January 23, 2009

'मिलिनेयर स्लमडॉग'

2:09 AM

स्लमडॉग मिलिनेयर के लिए खुशी का लम्हा अभी नहीं थमने वाला है। फिल्म को ऑस्कर अवॉर्ड के 9 कैटेगरी में 10 नामांकन मिले हैं। गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड के बाद इस फिल्म के दूसरी बड़ी खुशखबरी है। ऑस्कर अवॉर्ड के लिए फिल्म को 9 कैटेगरी में नॉमिनेट किया गया है। ये कैटेगरी हैं बेस्ट फिल्म , बेस्ट स्क्रीनप्ले, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट म्यूजिक, बेस्ट साउंड एडिटिंग, बेस्ट फिल्म एडिटिंग, बेस्ट सिनेमेटोग्राफी। फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर ए आर रहमान के दो गाने ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुए हैं। लेकिन स्लम़डॉग पर देश में हुए बवाल की फिल्म की रिलीज से पहले इस फिल्म की टाइटल को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया ,झुग्गी झोपड़ी संयुक्त संघर्ष समिति के जेनरल सेक्रेटरी तपेश्वर विश्वकर्मा ने फिल्म की टाइटल को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की है इस समिति का मानना है कि फिल्म का नाम स्लमडॉग रखकर गरीबों का मजाक उड़ाया गया है। फिल्म के टाइटल को लेकर इस समिति ने फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर ए आर रहमान और हीरो अनिल कपूर पर मानहानि का केस दायर किया है। फिल्म के डायरेक्टर डैनी बॉयल पर कोई केस नहीं दर्ज नहीं हुआ है। क्योंकि ये ब्रिटेन के नागरिक हैं। ये न्याय संगत है या नहीं...देश की जनता ही बताएगी फिल्म के रिलीज होने के बाद।

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Sunday, January 18, 2009

आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई, कहीं धोखा तो नहीं

9:06 AM

भारत और पाकिस्तान की.... लंबी बयानबाज़ियों के बाद पाकिस्तान ने भारत के दिए सबूतों को मान लिया... हालांकि पहले तो पाकिस्तान ने भारत की ओर से सौंपे गए सबूतों को महज जानकारी कह कर टाल दिया था....लेकिन बाद में दुनिया भर के देशों के दबाव में उसने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी....और आखिरकार मान लिया कि सबूतों में दम है .लेकिन इससे पहले पाकिस्तान ने भारत और पूरी दुनिया को खूब नाच नचाया पहले तो पाकिस्तान ने कहा कि वो किसी भी कीमत पर आतंकियों को भारत को नहीं सौंपेगा अगर इल्जाम साबित हो जाते हैं तो हम मुजरिमों को अपने कानून के मुताबिक सजा देंगे...क्योंकि हम पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होने दे सकते...हमारा रुख इस पर बिल्कुल साफ है.... उधर ब्रिटेन ने साफ-साफ कहा कि मुंबई पर आतंकी हमले पाकिस्तान की जमीन से लश्कर-ए-तैयबा ने किए हैं...भारत की यात्रा पर आए ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने पाकिस्तान को जल्द से जल्द कार्रवाई करने को कहा॥ नतीजा सामने था...दबाव में ही सही लेकिन पाकिस्तान ने कार्रवाई शुरू कर दी...आतंकी संगठन जमात-उद-दावा का चीफ हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी सहित 124 आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया सबको ये शक था कि कहीं पाकिस्तान पिछली बार की ही तरह इस बार भी सबको धोखा तो नहीं दे रहा...लेकिन दुनिया भर के देशों के बढ़ते दबाव के बाद पाकिस्तान को ये मानना पड़ा कि भारत ने जो सबूत उसे दिए हैं, वो केवल जानकारियो का पुलिंदा नहीं हैं, उनमें वाकई दम है...और वो उन पर कार्रवाई

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सच्ची श्रद्धा दुर्गति का आदर्श परिणाम होती है

8:07 AM

सच्ची श्रद्धा दुर्गति का आदर्श परिणाम होती है ये लाइन किसी महान व्यक्ति ने तो नही लिखी है, जिस पर राजनेताओं की तरह बहस शुरू हो या फिर सदी की युवा शक्ति के कंठ पर रट जाए... जिंदगी जीने की एक सीख को जो लोग पा जाते हैं वो शायद लेखक बन जाते है। और जो लोग अपनी राह में मृत संवेदनाओं के साथ एक गुजरा हुआ दिन बना लेते है। उन सभी को उनकी कब्रगाह में खोजता चला जा रहा हूं... हमेशा ही निश्छल व्यक्तित्व की खोज की में खुद को ढालता रहा ढूढ़ता हूं,... इसमें ऐसा भी कुछ नहीं है ये तो मेरे मन की उपजी एक धारणा है जिसका मै स्वयं ही इसका शाब्दिक मतलब और उनके वर्णो को सार्थक करने का एक प्रयास मै यहां करने जा रहा हूं....

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