Tuesday, July 28, 2009

Categorized |

फिर जाग उठा आरक्षण का 'भूत'

1:49 PM

एक बार फिर देश में आरक्षण का भूत जाग उठा। राजस्थान एक बार फिर आरक्षण की चिंगारियां सुलग उठी है, जिन्हे आग की भयंकर लपटें बनने में शायद ही दे लगे। राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जरो और सरकार में बातचीत के सफल नहीं हुई तो एक बार फिर से फिर गुर्जरों आंदोलन को कर सकते है। वैसे गुर्जरों की मांग नई नहीं है आरक्षण को लेकर गुर्जरों की मुहिम ने आजादी मिलने के तीन साल बाद ही जोर पकड़ लिया था मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा मिलने के बाद तो आरक्षण आंदोलन बेहद तेज हो गयागुर्जरों का आरक्षण के लिए संघर्ष लगभग 60 सालों से चल रहा है। आजादी मिलने के साथ ही गुर्जर अपने कौम के बेहतरी के लिए जूझ रहे हैं। इसी संघर्ष का नतीजा था कि 1951 में गुर्जरों को नॉन क्रिमिनल ट्राइब यानी गैर आपराधिक जनजाति का दर्जा मिला। लेकिन गुर्जरों की आरक्षण को लेकर मुहिम साल 1954 से शुरू हुई। जब मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा दिया गया और गुर्जरों की अपील खारिज कर दी गई। 1954 मीणा समुदाय को एसटी दर्जा मिला, गुर्जरों की अपील खारिज। लेकिन गुर्जरों की कोशिश साल 1981 के जनगणना के दौरान थोड़ी बहुत कामयाब होती दिखी जब उन्हें पहली बार पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। 1981 जनगणना में गुर्जरों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। लेकिन आरक्षण मुद्दे पर अपनी मांग को लेकर गुर्जरों का रूख शुरू से कड़ा था। और वो लगातार एसटी दर्जा दिए जाने की अपनी मांग पर कायम रहे। गुर्जरों की इस कोशिश को 1984 में शिवचरण माथुर की राजस्थान सरकार ने झटका दिया। राज्य सरकार ने एसटी दर्जा दिए जाने की मांग ठुकरा दी। 1984 - मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने गुर्जरों के एसटी दर्जा देने की मांग ठुकराई। गुर्जरों को वक्त-वक्त पर सरकार की ओर से दिलासा मिलता रहा। साल 1993 में इसी तरह का एक और आश्वासन गुर्जरों को राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करके दिया। 1993 गुर्जरों को ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा मिला। लेकिन 1999 में जाटों को ओबीसी का दर्जा मिलने पर गुर्जर एक बार फिर भड़के। 1999 जाटों को भी ओबीसी का दर्जा दिया गया। बीजेपी शासन के दौरान गुर्जरों का असली संघर्ष देखने को मिला। चुनाव कैंपेन के दौरान 2003 में वसुंधरा राजे ने एक बार फिर गुर्जरों को वादे का झुनझुना थमाया। 2003 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुर्जरों को एसटी दर्जा देने का वादा किया। वादा पूरा नहीं होने की सूरत में गुर्जर आंदोलन पर उतरे। साल 2007 में हुए आंदोलन के दौरान कई लोग मारे गए। 2007 एसटी दर्जे के लिए गुर्जर आंदोलन पर उतरे, आंदोलन के दौरान कई मारे गए। सरकार ने एक बार फिर गुर्जरों को दिलासा देने के लिए जस्टिस जसराज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। जून, 2007 गुर्जरों की मांग को लेकर जस्टिस जसराज चोपड़ा कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने गुर्जरों के आरक्षण की मांग को तो ठुकरा दिया। लेकिन उनके लिए स्पेशल पैकेज की मांग की। दिसंबर, 2007 जस्टिस चोपड़ा ने गुर्जरों को स्पेशल पैकेज देने की सिफारिश करते हुए आरक्षण की मांग खारिज की । इसी मुद्दे पर रामदास अग्रवाल कमेटी ने गुर्जर इलाके के लिए 2।82 अरब रुपए देने की सिफारिश की। 17 मई 2008 गुर्जर बहुल इलाके के लिए रामदास अग्रवाल कमिटी ने 2।82 अरब रुपए के पैकेज की सिफारिश की। 23 मई 2008 को गुर्जरों ने अपनी मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए। 23 मई 2008 गुर्जरों का प्रदर्शन, पुलिस फायरिंग में कई मरे। 26 मई बीजेपी की वसुंधरा सरकार ने मनमोहन सिंह को अपनी सिफारिश भेजी। 26 मई 2008 वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गुर्जरों को 4 से 6 फीसदी कोटा देने की सिफारिश की, 18 जून 2008 बीजेपी सरकार ने गुर्जरों के साथ रायका बंजारा और गड़िया लोहार को 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया। 18 जून, 2008 राजस्थान सरकार ने गुर्जरों के साथ तीन और जातियों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया। लेकिन आरक्षण का स्तर 50 फीसदी से ज्यादा होने की वजह से इस ऐलान ने संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया। 18 जून, 2008 गुर्जरों के साथ रायका, बंजारा और गड़िया लोहार को आरक्षण देने सिफारिश की लेकिन आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हुआ। तकरीबन एक साल बाद एक बार फिर गुर्जरों ने महापंचायत कर राज्य सरकार को 24 घंटे की मोहलत देते हुए। आंदोलन की धमकी दी है 27 जुलाई 2009 गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक बार फिर आंदोलन की धमकी दी। राजस्थान एक बार फिर सुलगने को है।

0 Responses to “फिर जाग उठा आरक्षण का 'भूत'”