Tuesday, July 28, 2009

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करगिल का काल, निगल गया कई लाल... विजय दिवस के १० साल ?

12:23 PM

करगिल... दुनिया के इस सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में आज से ठीक दस साल पहले भारत की जांबाज सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था॥ भारतीय सेना के इस शौर्य और जीत को पूरे देश विजय दिवस के रूप में मनाया गया । भारतीय सेना की जाबांजी और सैनिकों के सम्मान के लिये श्रीनगर के द्रास में विजय दिवस समारोह मनाया गया । इसमें करिगल युद्घ में शहीद सैनिकों का सम्मान किया गया। सेना कारगिल फतह का जश्न धूमधाम से मना रही थी। साथ ही शहीदों को श्रद्धांजलि भी दे रही है। अपना बलिदान देकर देश की आन-बान और शान को बचाने वाले शहीद जवानों के परिजनों का सम्मान किया गया। पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। मलिक उन्नीस सौ निन्यानवे में करगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय थल सेना के अध्यक्ष थे। दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जंग में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने दिल्ली के अमर ज्योति पहुंचे। छह मई को शुरु हुई ये लड़ाई दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र कारगिल में लड़ी गई थी अपने शौर्य और जज्बे से भारतीय सेना और वायुसेना ने दुश्मन को हार का मुंह दिखाया था। ये जंग भारतीय सेना के अलग-अलग रैंक के तकरीबन तीस हजार जवानों और अधिकारियों ने लड़ी थी। ऑपरेशन विजय को कामयाबी तक पहुंचाने में 527 जवानों ने अपने प्राणों की बलि दी और करीब 1300 जवान बुरी तरह जख्मी हुए थे सेना ने 26 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय में कामयाबी हासिल की। ये वो आंकड़े थे जो सरकारी थे। जंग में क्या हुआ ये सीमा पर लड़ रहे जवानों से बेहतर कोई नहीं बता सकता। जंग दो देश के बीच होती है लेकिन ये वो जंग थी जो अपने ही देश में लड़ी गई। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हमारी सीमा में घुसकर कई ठिकानों पक कब्जे भी कर लिए और हमें पता तक नहीं चला। दुश्मन पड़ोसी देश के सिपाहियों.. या कहें आतंकियों को खदेड़कर सरकार ने गर्व से कहा तो है कि हमने ये जंग जीत ली। लेकिन अपने लोगों को गंवाकर, ये सोचने का विषय है। भारत की प्राचीन परंपरा भी यही कहती है। सिर्फ बांटते रहो चाहे वो प्रेम हो या किसी की जान।

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