Tuesday, July 28, 2009
मसाज करवाइए, काम पर चलिए
1:52 PM
इटली के पीएम सिलवियो बर्लुस्कोनी की रंगीनमिजाजी के किस्से विश्व विख्यात हो रहे है। इटली के एक अखबार ने बर्लुस्कोनी के बारे में एक और गर्मागर्म खबर दी है। खबर यह है कि बर्लुस्कोनी ने पिछले साल एक स्पा में अपनी छुट्टियां बिताई थीं। खास बात यह है कि इस स्पा में उनके 'मसाज़' के लिए कुछ ग्लैमरस मॉडल्स और रिऐलिटी टीवी स्टार मौजूद थीं। अखबार के मुताबिक बर्लुस्कोनी पिछले साल 28 से 30 नवंबर तक इस स्पा में अपनी 'पीठ दर्द' से निजात पाने के लिए गए थे। तब उनकी खातिरदारी के लिए वहां कुछ नामी मॉडल्स और रिऐलिटी शो की स्टार्स भी मौजूद थीं। अखबार ने इनमें से दो लड़कियों की पहचान का दावा किया है। इनमें से एक टीवी स्टार बारबरा ग्वेरा और दूसरी मॉडल कम टीवी स्टार हैं। इन दोनों को बिजनसमन ग्रैमपाउलो ने इनवाइट किया था। बताया हैअब कोई प्रधानमंत्री मसाज भी नहीं करवा सकता क्या, अरे भई लड़कियों से करवाई तो क्या हुआ। पीठ का दर्द तो ठीक हो गया। वैसे भारत में रिएलिटी शोज के चलन ने कई देशों को पीछे छोड़ दिया है। जो इटली में हो रहा है वैसा होने में शायद.......
फिर जाग उठा आरक्षण का 'भूत'
1:49 PM
एक बार फिर देश में आरक्षण का भूत जाग उठा। राजस्थान एक बार फिर आरक्षण की चिंगारियां सुलग उठी है, जिन्हे आग की भयंकर लपटें बनने में शायद ही दे लगे। राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जरो और सरकार में बातचीत के सफल नहीं हुई तो एक बार फिर से फिर गुर्जरों आंदोलन को कर सकते है। वैसे गुर्जरों की मांग नई नहीं है आरक्षण को लेकर गुर्जरों की मुहिम ने आजादी मिलने के तीन साल बाद ही जोर पकड़ लिया था मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा मिलने के बाद तो आरक्षण आंदोलन बेहद तेज हो गयागुर्जरों का आरक्षण के लिए संघर्ष लगभग 60 सालों से चल रहा है। आजादी मिलने के साथ ही गुर्जर अपने कौम के बेहतरी के लिए जूझ रहे हैं। इसी संघर्ष का नतीजा था कि 1951 में गुर्जरों को नॉन क्रिमिनल ट्राइब यानी गैर आपराधिक जनजाति का दर्जा मिला। लेकिन गुर्जरों की आरक्षण को लेकर मुहिम साल 1954 से शुरू हुई। जब मीणा समुदाय को एसटी का दर्जा दिया गया और गुर्जरों की अपील खारिज कर दी गई। 1954 मीणा समुदाय को एसटी दर्जा मिला, गुर्जरों की अपील खारिज। लेकिन गुर्जरों की कोशिश साल 1981 के जनगणना के दौरान थोड़ी बहुत कामयाब होती दिखी जब उन्हें पहली बार पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। 1981 जनगणना में गुर्जरों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया। लेकिन आरक्षण मुद्दे पर अपनी मांग को लेकर गुर्जरों का रूख शुरू से कड़ा था। और वो लगातार एसटी दर्जा दिए जाने की अपनी मांग पर कायम रहे। गुर्जरों की इस कोशिश को 1984 में शिवचरण माथुर की राजस्थान सरकार ने झटका दिया। राज्य सरकार ने एसटी दर्जा दिए जाने की मांग ठुकरा दी। 1984 - मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने गुर्जरों के एसटी दर्जा देने की मांग ठुकराई। गुर्जरों को वक्त-वक्त पर सरकार की ओर से दिलासा मिलता रहा। साल 1993 में इसी तरह का एक और आश्वासन गुर्जरों को राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल करके दिया। 1993 गुर्जरों को ओबीसी यानि अन्य पिछड़ा वर्ग का दर्जा मिला। लेकिन 1999 में जाटों को ओबीसी का दर्जा मिलने पर गुर्जर एक बार फिर भड़के। 1999 जाटों को भी ओबीसी का दर्जा दिया गया। बीजेपी शासन के दौरान गुर्जरों का असली संघर्ष देखने को मिला। चुनाव कैंपेन के दौरान 2003 में वसुंधरा राजे ने एक बार फिर गुर्जरों को वादे का झुनझुना थमाया। 2003 मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुर्जरों को एसटी दर्जा देने का वादा किया। वादा पूरा नहीं होने की सूरत में गुर्जर आंदोलन पर उतरे। साल 2007 में हुए आंदोलन के दौरान कई लोग मारे गए। 2007 एसटी दर्जे के लिए गुर्जर आंदोलन पर उतरे, आंदोलन के दौरान कई मारे गए। सरकार ने एक बार फिर गुर्जरों को दिलासा देने के लिए जस्टिस जसराज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। जून, 2007 गुर्जरों की मांग को लेकर जस्टिस जसराज चोपड़ा कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने गुर्जरों के आरक्षण की मांग को तो ठुकरा दिया। लेकिन उनके लिए स्पेशल पैकेज की मांग की। दिसंबर, 2007 जस्टिस चोपड़ा ने गुर्जरों को स्पेशल पैकेज देने की सिफारिश करते हुए आरक्षण की मांग खारिज की । इसी मुद्दे पर रामदास अग्रवाल कमेटी ने गुर्जर इलाके के लिए 2।82 अरब रुपए देने की सिफारिश की। 17 मई 2008 गुर्जर बहुल इलाके के लिए रामदास अग्रवाल कमिटी ने 2।82 अरब रुपए के पैकेज की सिफारिश की। 23 मई 2008 को गुर्जरों ने अपनी मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी। जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए। 23 मई 2008 गुर्जरों का प्रदर्शन, पुलिस फायरिंग में कई मरे। 26 मई बीजेपी की वसुंधरा सरकार ने मनमोहन सिंह को अपनी सिफारिश भेजी। 26 मई 2008 वसुंधरा राजे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से गुर्जरों को 4 से 6 फीसदी कोटा देने की सिफारिश की, 18 जून 2008 बीजेपी सरकार ने गुर्जरों के साथ रायका बंजारा और गड़िया लोहार को 5 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया। 18 जून, 2008 राजस्थान सरकार ने गुर्जरों के साथ तीन और जातियों के लिए 5 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया। लेकिन आरक्षण का स्तर 50 फीसदी से ज्यादा होने की वजह से इस ऐलान ने संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया। 18 जून, 2008 गुर्जरों के साथ रायका, बंजारा और गड़िया लोहार को आरक्षण देने सिफारिश की लेकिन आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हुआ। तकरीबन एक साल बाद एक बार फिर गुर्जरों ने महापंचायत कर राज्य सरकार को 24 घंटे की मोहलत देते हुए। आंदोलन की धमकी दी है 27 जुलाई 2009 गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक बार फिर आंदोलन की धमकी दी। राजस्थान एक बार फिर सुलगने को है।
'अरिहंत' व्हाट नेक्स्ट
12:54 PM
आईएनएस अरिहंत जी हां यही नाम है भारत की उस नई ताकत का जिसने समुद्री में हमारी ताकत को एक नयी शक्ति से नवाजा है। देसी इंजीनियरिंग का यह कमाल वाकई अद्भुत है।भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत एक पनडुब्बी ही नहीं ये एक ऐसी ताकत है जिसके बल पर भारत समुद्र का राजा बन गया है । कोई दुश्मन देश समुद्री सीमा में घुसने तो क्या देखने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकेगी। भारत में ही बनी ये पनडुब्बी अत्याधुनिक तकनीक से लैस है। जो न केवल समंदर की प्रहरी होगी । बल्कि नौसेना के बेड़े में शामिल अरिहंत समंदर की सेनापति भी होगी । आईएनएस अरिहंत से देश ने कुछ ऐसी ही उम्मीदें बांध रखीं हैं। अत्याधुनिक तकनीक से बनी अरिहंत परंपरागत पनडुब्बियों के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है। आईएनएस अरिहंत को समंदर की सतह पर बैटरियों को चार्ज करने के लिए भी नहीं आना पड़ेगा। यानि ये पनडुब्बी लगातार समंदर में रह सकती है। इतना ही नहीं अरिहंत से मिसाइलें भी दागी जा सकती है । इसके लिए आईएनएस को देश की बहतरीन मिसाईलों से लैस किया जाएगा। जिसमें सागरिका मिसाइल के अलावा इसे अग्नि तीन से भी लैस किया जा सकता है। आईएनएस अरिंहत का वजन तकरीबन 6 हजार टन है 104 मीटर लंबी इस पनडुब्बी में एक साथ करीब सौ लोग रह सकते हैं एक बार समुंदर में उतरने के बाद अरिहंत अपने इम्तिहान के कड़े दौर से गुजरेगी । परिक्षण के दौरान आईएनएस अरिहंत को खुद को साबित करना होगा। क्योंकि इस पनडुब्बी की कामयाबी स्वदेशी तकनीकी के लिए नए रास्ते खोलेगी ।
करगिल का काल, निगल गया कई लाल... विजय दिवस के १० साल ?
12:23 PM
करगिल... दुनिया के इस सबसे ऊंचे रणक्षेत्र में आज से ठीक दस साल पहले भारत की जांबाज सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था॥ भारतीय सेना के इस शौर्य और जीत को पूरे देश विजय दिवस के रूप में मनाया गया । भारतीय सेना की जाबांजी और सैनिकों के सम्मान के लिये श्रीनगर के द्रास में विजय दिवस समारोह मनाया गया । इसमें करिगल युद्घ में शहीद सैनिकों का सम्मान किया गया। सेना कारगिल फतह का जश्न धूमधाम से मना रही थी। साथ ही शहीदों को श्रद्धांजलि भी दे रही है। अपना बलिदान देकर देश की आन-बान और शान को बचाने वाले शहीद जवानों के परिजनों का सम्मान किया गया। पूर्व थलसेना अध्यक्ष वीपी मलिक ने शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। मलिक उन्नीस सौ निन्यानवे में करगिल में ऑपरेशन विजय के दौरान भारतीय थल सेना के अध्यक्ष थे। दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जंग में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने दिल्ली के अमर ज्योति पहुंचे। छह मई को शुरु हुई ये लड़ाई दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्र कारगिल में लड़ी गई थी अपने शौर्य और जज्बे से भारतीय सेना और वायुसेना ने दुश्मन को हार का मुंह दिखाया था। ये जंग भारतीय सेना के अलग-अलग रैंक के तकरीबन तीस हजार जवानों और अधिकारियों ने लड़ी थी। ऑपरेशन विजय को कामयाबी तक पहुंचाने में 527 जवानों ने अपने प्राणों की बलि दी और करीब 1300 जवान बुरी तरह जख्मी हुए थे सेना ने 26 जुलाई 1999 को ऑपरेशन विजय में कामयाबी हासिल की। ये वो आंकड़े थे जो सरकारी थे। जंग में क्या हुआ ये सीमा पर लड़ रहे जवानों से बेहतर कोई नहीं बता सकता। जंग दो देश के बीच होती है लेकिन ये वो जंग थी जो अपने ही देश में लड़ी गई। पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हमारी सीमा में घुसकर कई ठिकानों पक कब्जे भी कर लिए और हमें पता तक नहीं चला। दुश्मन पड़ोसी देश के सिपाहियों.. या कहें आतंकियों को खदेड़कर सरकार ने गर्व से कहा तो है कि हमने ये जंग जीत ली। लेकिन अपने लोगों को गंवाकर, ये सोचने का विषय है। भारत की प्राचीन परंपरा भी यही कहती है। सिर्फ बांटते रहो चाहे वो प्रेम हो या किसी की जान।
Subscribe to:
Posts (Atom)