Friday, July 23, 2010
फिर बहके कदम...!
3:26 PM
कहावत है चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से न जाए....लेकिन ऐसा जरूरी नहीं किसी चोर लिए ही इस का मतलब निकाला जाए। हम यहां बात कर रहे हैं भारतीय क्रिकेट टीम में पूर्व कप्तान और यूपी के मुरादाबाद से सांसद मो. अजहरूद्दीन की, अजहर और उनकी पत्नी संगीता बिजलानी के बीच इन दिनों एक ज्वाला भड़क उठी है। ये शब्द आपको कुछ अटपटे से लगें लेकिन एक अखबार की खबर है कि मो. अजहरूद्दीन जल्दी ही संगीता को तलाक देकर ही बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा से तीसरी शादी करने वाले हैं।
एक बार फिर अजहर के लिए सब कुछ ठीक नहीं है। 47 साल के अजहर की जिन्दगी में 26 साल की ज्वाला के आ जाने की खबर से अजहर की दूसरी पत्नी संगीता बिजलानी के होश उड़ गए हैं। अजहर ने कुछ दिनों पहले बैडमिंटन संघ के चुनाव लड़ने की ठान ली थी। माना जा रहा है अजहर ये सब ज्वाला की वजह से कर रहे थे। ज्वाला ने अजहर को इस कदर अपना दीवाना बना दिया है कि अजहर जब भी हैदराबाद में होते हैं तो बैडमिंटन कोर्ट में नजर आते हैं। सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि अजहर ने ज्वाला को बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट में दी है।
भारतीय पिता और चीनी मां की पुत्री ज्वाला 7 बार राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियन रह चुकी हैं। ज्वाला ने बैडमिंटन खिलाड़ी चेतन आनंद से 17जुलाई 2005को शादी की। लेकिन अब दोनों के रिश्तों में दरारें पैदा हो गईं है। दोनों अलग-अलग रह रहे हैं लेकिन दोनों ने अपनी शादी टूटने जैसी खबरों से इनकार किया है। अजहर की पहली शादी नौरीन से हुई थी। उस शादी से अजहर के दो बेटे असाउद्दीन और अब्बासुद्दीन हैं। अजहर ने दूसरी शादी 1996 में सलमान खान की पूर्व गर्लफ्रेंड संगीता बिजलानी से की थी।
!!! मुरली तुम्हें सलाम !!!
12:44 PM
श्रीलंका के ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने टेस्ट क्रिकेट में 800 विकेट लेने वाले दुनिया के पहले गेंदबाज बन गए इसी के साथ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया। भारत के साथ अंतिम टेस्ट मैच खेल रहे मुरली ने दुनियाभर के बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द बने रहे। अपने आखिरी टेस्ट में दुनिया की नंबर एक टीम भारत को धूल चटाकर श्रीलंका को मैच जिताया।
श्रीलंका में कैंडी के पास एक छोटे से गांव नरटमपोथा में 17 अप्रैल 1972 को जन्में मुरलीधरन का 17 साल लंबा क्रिकेट करियर उनको एक महान गेंदबाज की श्रेणी में खड़ा करता है। मुरलीधरन की घूमती गेंदो से दुनिया के कई बल्लेबाज में खौफ खाते थे। अब वे शुक्र मना रहे हैं कि मुरली का सामना नहीं करना पड़ेगा। 28 अगस्त 1992 को ऑस्ट्रेलिया के साथ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने के बाद मुरली की गेंदों ने ऐसी धुन बजाई जिसका आंकड़ा आज पूरी दुनिया के सामने हैं। मुरलीधरन ने ग्लेन मैक्ग्रा, कर्टनी वॉल्श, वसीम अकरम और शेन वॉर्न जैसे शूरमाओं के रिकॉर्ड्स को ध्वस्त किया।
800 विकेट का कीर्तिमान बनाने से पहले मुरलीधरन की क्रिकेट लाइफ में कई दिक्कतें आईं। उन पर चकिंग के आरोप लगे, वे चोटों से परेशान रहे। लेकिन आईसीसी का बायोमेकेनिकल टेस्ट पास करने के बाद मुरली के खिलाफ उठने वाली आवाजें बंद हो गईं। मुरलीधरन ने अपनी एक कलात्मक तरीके से फेंकी जाने वाली गेंद ‘दूसरा’ का बल्लेबाजों पर खूब प्रयोग किया। गेंदबाजी के प्रत्येक डिपार्टमेंट में उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। मुरलीधरन की करिश्माई गेंदबाजी ने उन्हें एक कामयाब क्रिकेटर बनाया। स्वभाव शांत मुरलीधरन मैदान पर विपक्षी टीम के लिए किसी कयामत से कम नहीं थे। मुरलीधरन भारत में आईपीएल की चेन्नई टीम से खेलते हैं। इग्लैंड में लैंकशायर काउंटी में कई साल तक क्रिकेट खेला।
1996 में विश्वकप जीतने वाली श्रीलंकाई टीम में मुरलीधरन टीम का एक अहम हिस्सा थे। श्रीलंका को विदेशों में कई सीरीज अपने दम पर जिताने वाले इस गेंदबाज ने 21 मार्च 2005 को एक भारतीय मधिमलार राममूर्ति को अपनी जीवन संगिनी बनाया। स्पिन के इस जादूगर को हम सबका क्रिकेट प्रेमियो का सलाम। टेस्ट क्रिकेट में मुरली जैसी विदाई दुनिया के किसी भी गेंदबाज के लिए एक सपना सरीखा होगा। लेकिन अब ये सवाल पैदा होता है मुरलीधरन का रिकॉर्ड कौन तोड़ेगा।
Thursday, July 22, 2010
“लोकतंत्र” क्या एक मजाक है ?
2:14 PM
एक दिन किसी राष्ट्रीय न्यूज चैनल के प्राइम बुलेटिन के प्रोमो को देखकर मुझे बड़ी हैरानी हुई। प्रोमो में एक सनसनाती हुई आवाज में कोई कह रहा था “ हमारे देश में लोकतंत्र एक मजाक है” उस प्रोमो को मैंने कई बार देखा, मन विचलित हुआ, अपने आप ही एक सवाल पैदा हुआ। क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज एक मजाक बन कर रह गया है, चौथी दुनिया के लोग ये क्या दिखा रहे हैं। हमारे देश के सौ करोड़ से ज्यादा लोग इस लोकतंत्र का हिस्सा हैं, चुनाव में इन्हीं लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हमारे लोकतंत्र के संरक्षण के लिए दिन रात काम करते हैं। सवाल बड़ा पेचीदा था लेकिन जल्द ही मेरे इस सवाल का जवाब बिहार विधानसभा में हुए विधायकों के विरोध प्रदर्शन से मिल गया। 21 जुलाई को विधानसभा के भीतर विपक्षी पार्टियों के विधायकों ने जो तांडव मचाया उससे पूरा देश शर्मसार हुआ। विधानसभा स्पीकर पर चप्पल फेंकी गई, कुर्सियां तोड़ी, विधायकों में आपस में हाथापाई हुई, कांग्रेस की एक महिला विधायक ने तो हद ही कर दी, विधानभवन में रखे सारे गमलों को फेंक दिया और मार्शल के साथ हाथापाई की।
विधानसभा स्पीकर ने विधायकों पर कार्रवाई करते हुए विपक्ष के 67 विधायकों को निलंबित कर दिया। विधानसभा में विधायकों के इस अमानवीय व्यव्हार से दुनिया में भारत की छवि फिर एक बार छवि खराब हुई है। दरअसल बिहार में विकास के कार्यों में खर्च का ब्यौरा सही से नहीं देने पर पटना उच्च न्यायालय द्वारा मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद से विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। मुख्यमंत्री समेत 29 लोगों पर इस घोटाला में शामिल होने का आरोप है।
इस घटना से ऐसा लगता है देश में विधानसभाएं अब राजनीतिक दलों के लिए लड़ाई का अखाड़ा बनती जा रही है कोई भी मुद्दा हो बस जूतम-पैजार शुरू हो जाती है। लोकतंत्र का चीर हरण कर रहे इन नेताओं को सदन की मर्यादा का जरा भी ख्याल नहीं आता। पिछले कुछ सालों में उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में विधायकों ने अपनी मर्यादा को ताक पर रखकर अभद्र व्यवहार किया। बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में विपक्ष को ट्रेजरी घोटाले के रूप में बैठे बिठाए एक सुनहरा मौके मिल गया जो पिछले 5 साल से वो ढूंढ रहा था।
विधानसभा में हुए हंगामे के बाद लालू यादव सफाई देते हुए कहा "नीतीश कुमार सीबीआई जांच से डर गए हैं वे घबरा रहे हैं कि चुनाव में उनका क्या होगा"। भई इस राजनीति के दलदल में दूध का धुला नेता तो मिलना तो नामुमकिन सा लगता है। बिहार में जब लालू जी पर सत्ता का सुख भोग रहे थे तब उन पर कई अरबों रुपए डकारने के आरोप लगे जिसकी सीबीआई जांच चल रही है..नीतीश कुमार इसी मुद्दे को भुना भुना कर बिहार की गद्दी पर बैठे। नीतीश सरकार में इतना बड़ा घोटाला पहली बार हुआ है इसलिए शायद उनको डर लग रहा है इस बात का सबूत इस बात से मिलता है नीतीश कुमार ने अपने खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश आते ही जजों को खाने पर बुला लिया। हालांकि जज नहीं पहुंचे। लेकिन उनकी ये हरकत उनके डर को जग जाहिर करने के लिए काफी थी। इस विवाद का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को होने की उम्मीद नजर आ रही है.. मोदी विवाद में बीजेपी की फजीहत कर चुके नीतीश कुमार अब पहाड़ के नीचे आ गए हैं। उन पर उंगलियां उठ रही हैं.. सहयोगी बीजेपी क्या कदम उठाएगी पता नहीं.. लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन जीता तो ये मुमकिन है कि बिहार में भी बीजेपी का एक और मोदी राज्य की सत्ता संभालेगा।
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