Thursday, July 22, 2010

Categorized |

“लोकतंत्र” क्या एक मजाक है ?

2:14 PM

एक दिन किसी राष्ट्रीय न्यूज चैनल के प्राइम बुलेटिन के प्रोमो को देखकर मुझे बड़ी हैरानी हुई। प्रोमो में एक सनसनाती हुई आवाज में कोई कह रहा थाहमारे देश में लोकतंत्र एक मजाक हैउस प्रोमो को मैंने कई बार देखा, मन विचलित हुआ, अपने आप ही एक सवाल पैदा हुआ। क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र आज एक मजाक बन कर रह गया है, चौथी दुनिया के लोग ये क्या दिखा रहे हैं। हमारे देश के सौ करोड़ से ज्यादा लोग इस लोकतंत्र का हिस्सा हैं, चुनाव में इन्हीं लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हमारे लोकतंत्र के संरक्षण के लिए दिन रात काम करते हैं। सवाल बड़ा पेचीदा था लेकिन जल्द ही मेरे इस सवाल का जवाब बिहार विधानसभा में हुए विधायकों के विरोध प्रदर्शन से मिल गया। 21 जुलाई को विधानसभा के भीतर विपक्षी पार्टियों के विधायकों ने जो तांडव मचाया उससे पूरा देश शर्मसार हुआ। विधानसभा स्पीकर पर चप्पल फेंकी गई, कुर्सियां तोड़ी, विधायकों में आपस में हाथापाई हुई, कांग्रेस की एक महिला विधायक ने तो हद ही कर दी, विधानभवन में रखे सारे गमलों को फेंक दिया और मार्शल के साथ हाथापाई की।




विधानसभा स्पीकर ने विधायकों पर कार्रवाई करते हुए विपक्ष के 67 विधायकों को निलंबित कर दिया। विधानसभा में विधायकों के इस अमानवीय व्यव्हार से दुनिया में भारत की छवि फिर एक बार छवि खराब हुई है। दरअसल बिहार में विकास के कार्यों में खर्च का ब्यौरा सही से नहीं देने पर पटना उच्च न्यायालय द्वारा मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद से विपक्ष लगातार मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। मुख्यमंत्री समेत 29 लोगों पर इस घोटाला में शामिल होने का आरोप है।




इस घटना से ऐसा लगता है देश में विधानसभाएं अब राजनीतिक दलों के लिए लड़ाई का अखाड़ा बनती जा रही है कोई भी मुद्दा हो बस जूतम-पैजार शुरू हो जाती है। लोकतंत्र का चीर हरण कर रहे इन नेताओं को सदन की मर्यादा का जरा भी ख्याल नहीं आता। पिछले कुछ सालों में उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में विधायकों ने अपनी मर्यादा को ताक पर रखकर अभद्र व्यवहार किया। बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में विपक्ष को ट्रेजरी घोटाले के रूप में बैठे बिठाए एक सुनहरा मौके मिल गया जो पिछले 5 साल से वो ढूंढ रहा था।


विधानसभा में हुए हंगामे के बाद लालू यादव सफाई देते हुए कहा "नीतीश कुमार सीबीआई जांच से डर गए हैं वे घबरा रहे हैं कि चुनाव में उनका क्या होगा" भई इस राजनीति के दलदल में दूध का धुला नेता तो मिलना तो नामुमकिन सा लगता है। बिहार में जब लालू जी पर सत्ता का सुख भोग रहे थे तब उन पर कई अरबों रुपए डकारने के आरोप लगे जिसकी सीबीआई जांच चल रही है..नीतीश कुमार इसी मुद्दे को भुना भुना कर बिहार की गद्दी पर बैठे। नीतीश सरकार में इतना बड़ा घोटाला पहली बार हुआ है इसलिए शायद उनको डर लग रहा है इस बात का सबूत इस बात से मिलता है नीतीश कुमार ने अपने खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश आते ही जजों को खाने पर बुला लिया। हालांकि जज नहीं पहुंचे। लेकिन उनकी ये हरकत उनके डर को जग जाहिर करने के लिए काफी थी। इस विवाद का सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को होने की उम्मीद नजर रही है.. मोदी विवाद में बीजेपी की फजीहत कर चुके नीतीश कुमार अब पहाड़ के नीचे गए हैं। उन पर उंगलियां उठ रही हैं.. सहयोगी बीजेपी क्या कदम उठाएगी पता नहीं.. लेकिन आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन जीता तो ये मुमकिन है कि बिहार में भी बीजेपी का एक और मोदी राज्य की सत्ता संभालेगा।

0 Responses to ““लोकतंत्र” क्या एक मजाक है ?”