Thursday, June 24, 2010
Categorized | राजनीति
नेताओं की नौटंकी, जनता का मनोरंजन
6:31 PM
बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में कोई यात्राएं निकाल रहा है तो कोई भड़ास निकाल रहा है। सभी दल अपनी अपनी तैयारियों में जुटे हैं। सभी पार्टियां अपनी रणनीतियां बना रहीं है। जिसमें लोगों का मनोरंजन भी शामिल है, जो चुनाव प्रचार के दौरान लोगों का मनोरंजन करती है। नौटंकी का कई मौकों पर विशेष महत्व होता है। ये नौटंकियां चुनाव में खड़े नेताओं द्वारा प्रायोजक होती है, हालांकि नौटंकियों में नाचने वाले लोगों को पर जो पैसा है फेंका जाता है वो आम जनता और व्यापारियों की तिजोरी से ही निकला होता है। नौटंकियों से राजनेताओं को लोगों का रूझान पता चल जाता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। वक्त बदल रहा है अब चुनाव में नौटंकियों का जिम्मा खुद राजनेताओं ने ले लिया है। हाल ही में बीजेपी-जेडीयू की आपसी रस्साकशी को आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने नौटंकी करार दिया। नौटंकी की शुरूआत बिहार के अखबारों में बीजेपी के चर्चित नेता नरेंद्र मोदी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री के साथ तस्वीर छापने से शुरू हुआ। नीतीश कुमार ने तस्वीर छापने पर आपत्ति जताई और रात्रि भोज भी कैंसिल कर दिया। इसका असर तुरंत बीजेपी की रैली में देखने को मिला। जब नरेंद्र मोदी ने बिहार में विकास की तारीफ तो की लेकिन नीतीश का नाम तक नहीं लिया। नीतीश से कुछ पत्रकार भाईयों ने पूछ लिया गुजरात ने बिहार को कोसी के लिए सहायता दी थी। बस नीतीश ने आव देखा न ताव कर दिया ऐलान, वापस कर देंगे रुपए वो तो खर्च ही नहीं हुए। नीतीश ने गुजरात को 5 करोड़ का चेक लौटा दिया। नौटंकी यहीं खत्म नहीं हुई। नीतीश ने ऐलान कर दिया नरेंद्र मोदी और वरुण गांधी बिहार में चुनाव प्रचार करने नहीं आएंगे। बिहार के उप मुख्यमंत्री के साथ चुनावी यात्रा में नहीं गए। दोनों पार्टियों के नेता टीवी पर एक-दूसरे पर आरोप लगाते पाए गए। बड़े नेता इससे थोड़ा बचते रहे। लेकिन जब बड़े नेताओं ने खुलकर नीतीश का विरोध किया तो दोनों में ठन गई। इस निर्थक युद्ध को सभी प्रमुख गैर एनडीए पार्टियों ने ‘नाटक’ करार दिया जो कि दोनों ही पार्टियां कर रही हैं। लेकिन देश की प्रमुख पार्टियों में शामिल बीजेपी क्या सत्ता लोभ में अपने नेताओं को बेइज्जत भी करा सकती है ये इस नौटंकी में पहली बार देखने को मिला। नीतीश कुमार को गठबंधन की राजनीति अब शायद बीजेपी के साथ नहीं सुहा रही, वे बिहार में कुछ नया खोज रहे हैं। बिहार में बीजेपी का भविष्य क्या है ये उनको खुद तय करना होगा। कोसी आपदा के लिए अरबों रुपए धन लिया, खर्च एक पाई नहीं किया। ऐसे में जनता को मूर्ख समझने वाले नीतीश कुमार को आगामी चुनाव में जनता क्या सबक सिखाएगी इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।This post was written by:
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