Thursday, September 9, 2010

कहिए प्रधानमंत्री जी कब इस्तीफा दे रहे हैं ?

7:59 PM

जयपुर के एक गांव फागी में सरकारी कंपनी बीएसएनएल ने 1हजार बीपीएल परिवारों को मुफ्त मोबाइल बांटे। लेकिन राजस्थान सरकार ने इन्हीं बीपीएल परिवारों को मिलने वाले गेहूं का कोटा 35 किलो से घटाकर 25 किलो कर दिया। जरूरत अनाज की थी लेकिन सरकार को लगता है इन लोगों को रोटी से ज्यादा मोबाइल की जरूरत है। राज्य में बीपीएल धारकों की संख्या 24 लाख है, फिर सरकार ने केवल 1हजार लोगों को ही मुफ्त मोबाइल क्यों बांटे। बीपीएल परिवारों को बांटे गए मोबाइल का उपयोग वे कितना कर पाते हैं ये तो वक्त ही बताएगा लेकिन गरीबी दूर करने के सरकार के ऐसे प्रयासों से तो ऐसा ही लगता है कि सरकार गरीबी का केवल मजाक उड़ा रही है।
 

संसद में पक्ष-विपक्ष का काम एक दूसरे पर आऱोप लगाना और छींटाकशी करना रह गया है, लेकिन सदन के बाहर भी ये जन प्रतिनिधि मौके नहीं चूकते और गाहे बगाहे मीडिया के सामने अपनी भड़ास मिटाते रहते हैं। ऐसे ही एक टीवी शो में सीपीआई नेता अतुल अंजान ने सरकार को गैर पढ़े लिखों की जमात कह दिया, ये बयान ज्यादा सुर्खियां तो नहीं बटोर सका लेकिन केंद्र को एक आईना जरूर दिखा दिया। भंडारण की कमी का रोना रो रही केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था “यदि अनाज को रखने की जगह नहीं है सड़ाने से अच्छा है गरीबों में बांट दिया जाए”। लेकिन केंद्र के बिजी मंत्री शरद पवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश,आदेश नहीं सलाह लगी। शरद पवार कन्फ्यूज हो गए और कह दिया,“सुप्रीम कोर्ट ने हमें सुझाव दिया है,ऐसा करना आसान नहीं है”। जब कार्यवाही नहीं हुई तो सुप्रीम कोर्ट ने फिर सरकार को डांट पिलाई। लेकिन सरकार डांट खाने के बाद भी सरकार नहीं सुधरी...अबकी बार मैदान में स्वयं पीएम उतर गए। मनमोहन सिंह ने कहा कि “अनाज गरीब परिवारों में नहीं बांटा जा सकता,न्यायपालिका सरकार की नीतियों में दखल न दे”। बिल्कुल सही कहा..कानून बनाने वालों को कोई कानून सिखाए तो गुस्सा तो आएगा ही,अनाज मत लो मोबाइल ले लो,मोबाइल से बात करोगे तो पेट भर जाएगा। फिर महंगाई के मुद्दे पर बोले प्रधानमंत्री, “मुझे नहीं पता महंगाई कब कम होगी मैं कोई ज्योतिष नहीं हूं” अरे भाई आप ज्योतिष नहीं है तो सरकार क्यों चला रहे हैं। हमारे देश में लोग प्रधानमंत्री को किसी ज्योतिष से कम नहीं समझते हैं जिसे सब कुछ पता होता। है।

सरकार दिन पर दिन असंवेदनशील होती जा रही है, मंत्रियों की बातें तो बेलगाम थी हीं. अब पीएम भी इस वाकयुद्ध में कूद पड़े हैं। कॉमनवेल्थ में घोटाले का दंश,कश्मीर में विद्रोह और महंगाई से हार चुकी सरकार को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है। सरकार के मंत्री अपनी शर्तों पर काम करते हुए औने पौने बयान दे रहे हैं,मंत्रियों के लिए कभी भगवा रंग आतंक का पर्याय बन जाता है तो कभी हार्डकोर नक्सली के मारे जाने की जांच की बात कही जाती है। दोहरे चरित्र वाली सरकार ने आईपीएल में नाम आने पर थरूर को थलग कर दिया लेकिन घोटालों के महाराजा ए.राजा का पावर अभी भी बरकरार रखा है। यूपीए अध्यक्ष कहती है किसानों के हितों का ख्याल रखा जाए। लेकिन कैसे, जिस किसान का कोई खैरख्वाह नहीं, उस की जमीन पर राजनीति हो रही है उसकी जमीन छीनकर उसे जबर्दस्ती करोड़पति बनाया जा रहा हैं सरकार के पास अब मुद्दे नहीं हैं किस मुंह से बिहार,बंगाल चुनाव लड़ेगी पता नहीं। सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार चरम पर है,सरकारी नीतियां खोखली साबित हो रही है,खाद्यान्न बढ़ रहा है,साथ-साथ महंगाई की मार भी बढ़ी है। बिचौलियों के हाथों की कठपुतली बन चुकी सरकार के पास खुद बचाने का छोड़ो भागने का भी रास्ते नहीं बचा है। हमारे शांत स्वभावी अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री की नीतियां गड़बड़ा रही हैं क्या यही उनकी बौखलाहट का कारण भी बन रही है। ऐसे वक्त में ये बात मनमोहन सिंह के लिए बिल्कुल फिट बैठती नजर आती है... कहिए प्रधानमंत्री जी कब इस्तीफा दे रहे हैं।

2 Responses to “कहिए प्रधानमंत्री जी कब इस्तीफा दे रहे हैं ?”

vinisha kataria said...
September 12, 2010 at 11:43 PM

Mr PM tab isteefa denge when he will be told so by our real PM Mrs Gandhi, Until then, just wait and watch how our conditions deteriorate.


Anonymous said...
September 15, 2010 at 4:10 AM

मोबाइल जेब में हो ...खाना तो मिल ही जायेगा